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22 जनवरी 2018

लोकतंत्र के सच्चे प्रहरी वकील साथियों

लोकतंत्र के सच्चे प्रहरी वकील साथियों ,,,वकीलों को बुढ़ापे में अपराधी समझकर उनकी डिग्रियां जाँच कराने ,,वकीलों की गुणवत्ता पर प्रश्नचिन्ह लगाकर उनके पंजीकरण को नवीनीकरण करवाने वाले ,,वकीलों के कल्याण के नाम पर मृत्यु पर परिजनों को मात्र तुच्छ राशि ,,देना ,,मेडिकल इलाज के नाम पर ऊंट के मुझ में जीरा की तरह आर्थिक मदद ,,देने जैसी ,,अलोकतांत्रिक ,,प्रक्रिया को बदलकर ,,हर साल ,,राजस्थान के सभी वकीलों की ,,स्नेह भोज के साथ ,,साधारण सभा ,,ज़िलों ,,क्षेत्रीय अभिभाषक परिषदों की साल में ,,बारकोंसिल के साथ त्रेमासिक बैठक में समस्याओ पर चर्चा कर उनके समाधान के प्रयास अगर आप चाहते है ,तो प्लीज़ ,, आगामी 28 मार्च को होने वाले बार कौंसिल ऑफ़ राजस्थान के चुनाव में मुझे प्रथम वरीयता का वोट देकर अनुग्रहित करे ,,आपका साथ ,,आपका विश्वास रहेगा ,,मरते दम तक हर क़ीमत पर वकीलों के हक़ में संघर्ष होगा ,,अख्तर

क़ुरान का सन्देश

और जब तुम अपनी बीवियों को तलाक़ दो और उनकी मुद्दत पूरी होने को आए तो अच्छे उनवान से उन को रोक लो या हुस्ने सुलूक से बिल्कुल रुख़सत ही कर दो और उन्हें तकलीफ पहुँचाने के लिए न रोको ताकि (फिर उन पर) ज़्यादती करने लगो और जो ऐसा करेगा तो यक़ीनन अपने ही पर जु़ल्म करेगा और ख़ुदा के एहकाम को कुछ हँसी ठट्टा न समझो और ख़ुदा ने जो तुम्हें नेअमतें दी हैं उन्हें याद करो और जो किताब और अक़्ल की बातें तुम पर नाजि़ल की उनसे तुम्हारी नसीहत करता है और ख़ुदा से डरते रहो और समझ रखो कि ख़ुदा हर चीज़ को ज़रुर जानता है (231) और जब तुम औरतों को तलाक़ दो और वह अपनी मुद्दत (इद्दत) पूरी कर लें तो उन्हें अपने शौहरो के साथ निकाह करने से न रोकों जब आपस में दोनों मिया बीवी शयरीयत के मुवाफिक़ अच्छी तरह मिल जुल जाएँ ये उसी शख्स को नसीहत की जाती है जो तुम में से ख़ुदा और रोजे़ आखे़रत पर ईमान ला चुका हो यही तुम्हारे हक़ में बड़ी पाकीज़ा और सफ़ाई की बात है और उसकी ख़ूबी ख़ुदा खूब जानता है और तुम (वैसा) नहीं जानते हो (232)
और (तलाक़ देने के बाद) जो शख्स अपनी औलाद को पूरी मुद्दत तक दूध पिलवाना चाहे तो उसकी ख़ातिर से माएँ अपनी औलाद को पूरे दो बरस दूध पिलाएँ और जिसका वह लड़का है उस बाप पर माओं का खाना कपड़ा दस्तूर के मुताबिक़ लाजि़म है किसी शख्स को ज़हमत नहीं दी जाती मगर उसकी गुन्जाइश भर न माँ का उस के बच्चे की वजह से नुक़सान गवारा किया जाए और न जिस का लड़का है उसका बाप का (बल्कि दस्तूर के मुताबिक़ दिया जाए) और अगर बाप न हो तो दूध पिलाने का हक़ उसी तरह वारिस पर लाजि़म है फिर अगर दो बरस के क़ब्ल माँ बाप दोनों अपनी मरज़ी और मशवरे से दूध बढ़ाई करना चाहें तो उन दोनों पर कोई गुनाह नहीं और अगर तुम अपनी औलाद को (किसी अन्ना से) दूध पिलवाना चाहो तो उस में भी तुम पर कुछ गुनाह नहीं है बशर्ते कि जो तुमने दस्तूर के मुताबिक़ मुक़र्रर किया है उन के हवाले कर दो और ख़ुदा से डरते रहो और जान रखो कि जो कुछ तुम करते हो ख़ुदा ज़रुर देखता है (233)
और तुममें से जो लोग बीवियाँ छोड़ के मर जाएँ तो ये औरतें चार महीने दस रोज़ (इद्दा भर) अपने को रोके (और दूसरा निकाह न करें) फिर जब (इद्दे की मुद्दत) पूरी कर ले तो शरीयत के मुताबिक़ जो कुछ अपने हक़ में करें इस बारे में तुम पर कोई इल्ज़ाम नहीं है और जो कुछ तुम करते हो ख़ुदा उस से ख़बरदार है (234)
और अगर तुम (उस ख़ौफ से कि शायद कोई दूसरा निकाह कर ले) इन औरतों से इशरतन निकाह की (कैद़ इद्दा) ख़ास्तगारी {उम्मीदवारी} करो या अपने दिलो में छिपाए रखो तो इसमें भी कुछ तुम पर इल्ज़ाम नहीं हैं (क्योंकि) ख़ुदा को मालूम है कि (तुमसे सब्र न हो सकेगा और) उन औरतों से निकाह करने का ख़्याल आएगा लेकिन चोरी छिपे से निकाह का वायदा न करना मगर ये कि उन से अच्छी बात कह गुज़रों (तो मज़ाएक़ा नहीं) और जब तक मुक़र्रर मियाद गुज़र न जाए निकाह का क़सद {इरादा} भी न करना और समझ रखो कि जो कुछ तुम्हारी दिल में है ख़ुदा उस को ज़रुर जानता है तो उस से डरते रहो और (ये भी) जान लो कि ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला बुर्दबार है (235)
और अगर तुम ने अपनी बीवियों को हाथ तक न लगाया हो और न महर मुअय्यन किया हो और उसके क़ब्ल ही तुम उनको तलाक़ दे दो (तो इस में भी) तुम पर कुछ इल्ज़ाम नहीं है हाँ उन औरतों के साथ (दस्तूर के मुताबिक़) मालदार पर अपनी हैसियत के मुआफिक़ और ग़रीब पर अपनी हैसियत के मुवाफिक़ (कपड़े रुपए वग़ैरह से) कुछ सुलूक करना लाजि़म है नेकी करने वालों पर ये भी एक हक़ है (236)
और अगर तुम उन औरतों का मेहर तो मुअय्यन कर चुके हो मगर हाथ लगाने के क़ब्ल ही तलाक़ दे दो तो उन औरतों को मेहर मुअय्यन का आधा दे दो मगर ये कि ये औरतें ख़ुद माफ कर दें या उन का वली जिसके हाथ में उनके निकाह का एख़्तेयार हो माफ़ कर दे (तब कुछ नही) और अगर तुम ही सारा मेहर बख्स दो तो परहेज़गारी से बहुत ही क़रीब है और आपस की बुज़ुर्गी को मत भूलो और जो कुछ तुम करते हो ख़ुदा ज़रुर देख रहा है (237)
और (मुसलमानों) तुम तमाम नमाज़ों की और ख़ुसूसन बीच वाली नमाज़ सुबह या ज़ोहर या अस्र की पाबन्दी करो और ख़ास ख़ुदा ही वास्ते नमाज़ में क़ुनूत पढ़ने वाले हो कर खड़े हो फिर अगर तुम ख़ौफ की हालत में हो (238)
और पूरी नमाज़ न पढ़ सको तो सवार या पैदल जिस तरह बन पड़े पढ़ लो फिर जब तुम्हें इत्मेनान हो तो जिस तरह ख़ुदा ने तुम्हें (अपने रसूल की मारफ़त इन बातों को सिखाया है जो तुम नहीं जानते थे (239)
उसी तरह ख़ुदा को याद करो और तुम में से जो लोग अपनी बीवियों को छोड़ कर मर जाएँ उन पर अपनी बीबियों के हक़ में साल भर तक के नान व नुफ्का {रोटी कपड़ा} और (घर से) न निकलने की वसीयत करनी (लाजि़म) है बस अगर औरतें ख़ुद निकल खड़ी हो तो जायज़ बातों (निकाह वगै़रह) से कुछ अपने हक़ में करे उसका तुम पर कुछ इल्ज़ाम नही है और ख़ुदा हर शैय पर ग़ालिब और हिक़मत वाला है (240)

21 जनवरी 2018

क़ुरआन का सन्देश

(ऐ रसूल) बनी इसराइल से पूछो कि हम ने उन को कैसी कैसी रौशन निशानियाँ दी और जब किसी शख्स के पास ख़ुदा की नेअमत (किताब) आ चुकी उस के बाद भी उस को बदल डाले तो बेषक़ ख़ुदा सख़्त अज़ाब वाला है (211)  जिन लोगों ने कुफ्र इख़्तेयार किया उन के लिये दुनिया की ज़रा सी जि़न्दगी ख़ूब अच्छी दिखायी गयी है और इमानदारों से मसखरापन करते हैं हालाकि क़यामत के दिन परहेज़गारों का दरजा उनसे (कहीं) बढ़ चढ़ के होगा और ख़ुदा जिस को चाहता है बे हिसाब रोज़ी अता फरमाता है (212)
(पहले) सब लोग एक ही दीन रखते थे (फिर आपस में झगड़ने लगे तब) ख़ुदा ने नजात से ख़ुशख़बरी देने वाले और अज़ाब से डराने वाले पैग़म्बरों को भेजा और इन पैग़म्बरों के साथ बरहक़ किताब भी नाजि़ल की ताकि जिन बातों में लोग झगड़ते थे किताबे ख़़ुदा (उसका) फ़ैसला कर दे और फिर अफ़सोस तो ये है कि इस हुक्म से इख़्तेलाफ किया भी तो उन्हीं लोगों ने जिन को किताब दी गयी थी और वह भी जब उन के पास ख़ुदा के साफ एहकाम आ चुके उसके बाद और वह भी आपस की शरारत से तब ख़ुदा ने अपनी मेहरबानी से (ख़ालिस) ईमानदारों को वह राहे हक़ दिखा दी जिस में उन लोगों ने इख़्तेलाफ डाल रखा था और ख़़ुदा जिस को चाहे राहे रास्त की हिदायत करता है (213)
क्या तुम ये ख़्याल करते हो कि बेह्श्ते में पहुँच ही जाओगे हालाकि अभी तक तुम्हे अगले ज़माने वालों की सी हालत नहीं पेश आयी कि उन्हें तरह तरह की तक़लीफों (फाक़ा कशी मोहताजी) और बीमारी ने घेर लिया था और ज़लज़ले में इस क़दर झिंझोडे़ गए कि आखि़र (आजि़ज़ हो के) पैग़म्बर और ईमान वाले जो उन के साथ थे कहने लगे देखिए ख़ुदा की मदद कब (होती) है देखो (घबराओ नहीं) ख़़ुदा की मदद यक़ीनन बहुत क़रीब है (214)
(ऐ रसूल) तुमसे लोग पूछते हैं कि हम ख़ुदा की राह में क्या खर्च करें (तो तुम उन्हें) जवाब दो कि तुम अपनी नेक कमाई से जो कुछ खर्च करो तो (वह तुम्हारे माँ बाप और क़राबतदारों और यतीमों और मोहताजो और परदेसियों का हक़ है और तुम कोई नेक सा काम करो ख़़ुदा उसको ज़रुर जानता है (215)
(मुसलमानों) तुम पर जिहाद फर्ज़ किया गया अगरचे तुम पर शाक़ ज़रुर है और अजब नहीं कि तुम किसी चीज़ (जिहाद) को नापसन्द करो हालाकि वह तुम्हारे हक़ में बेहतर हो और अजब नहीं कि तुम किसी चीज़ को पसन्द करो हालाॅकि वह तुम्हारे हक़ में बुरी हो और ख़ुदा (तो) जानता ही है मगर तुम नही जानते हो (216)
(ऐ रसूल) तुमसे लोग हुरमत वाले महीनों की निस्बत पूछते हैं कि (आया) जिहाद उनमें जायज़ है तो तुम उन्हें जवाब दो कि इन महीनों में जेहाद बड़ा गुनाह है और ये भी याद रहे कि ख़़ुदा की राह से रोकना और ख़ुदा से इन्कार और मस्जिदुल हराम (काबा) से रोकना और जो उस के एहल है उनका मस्जिद से निकाल बाहर करना (ये सब) ख़ुदा के नज़दीक इस से भी बढ़कर गुनाह है और फि़तना परदाज़ी कुश्ती ख़़ून से भी बढ़ कर है और ये कुफ़्फ़ार हमेशा तुम से लड़ते ही चले जाएँगें यहाँ तक कि अगर उन का बस चले तो तुम को तुम्हारे दीन से फिरा दे और तुम में जो शख्स अपने दीन से फिरा और कुफ्ऱ की हालत में मर गया तो ऐसों ही का किया कराया सब कुछ दुनिया और आखे़रत (दोनों) में अकारत है और यही लोग जहन्नुमी हैं (और) वह उसी में हमेशा रहेंगें (217)
बेशक जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और ख़ुदा की राह में हिजरत की और जिहाद किया यही लोग रहमते ख़ुदा के उम्मीदवार हैं और ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है (218)
(ऐ रसूल) तुमसे लोग शराब और जुए के बारे में पूछते हैं तो तुम उन से कह दो कि इन दोनो में बड़ा गुनाह है और कुछ फायदे भी हैं और उन के फायदे से उन का गुनाह बढ़ के है और तुम से लोग पूछते हैं कि ख़ुदा की राह में क्या ख़र्च करे तुम उनसे कह दो कि जो तुम्हारे ज़रुरत से बचे यूँ ख़ुदा अपने एहकाम तुम से साफ़ साफ़ बयान करता है (219)
ताकि तुम दुनिया और आखि़रत (के मामलात) में ग़ौर करो और तुम से लोग यतीमों के बारे में पूछते हैं तुम (उन से) कह दो कि उनकी (इसलाह दुरुस्ती) बेहतर है और अगर तुम उन से मिलजुल कर रहो तो (कुछ हर्ज) नहीं आखि़र वह तुम्हारें भाई ही तो हैं और ख़ुदा फ़सादी को ख़ैर ख़्वाह से (अलग ख़ूब) जानता है और अगर ख़ुदा चाहता तो तुम को मुसीबत में डाल देता बेशक ख़ुदा ज़बरदस्त हिक़मत वाला है (220)

20 जनवरी 2018

हज सब्सिडी ख़त्म होनें की घोषणा पर खुश

हज सब्सिडी ख़त्म होनें की घोषणा पर खुश हो कर बवाल काटनें वाले भक्त ये पोस्ट को ध्यान से पढ़ें !
अब ये 700 करोड़ जो Indian Air line को मदद के रुप होते थे, वो अल्प संख्यक मुस्लिम मद्रासो मे पढ़ने वाली मुस्लिम लड़कीयों और मद्रासो के विकास मे होगा बताया गया है !
जो मुस्लिमों की ही वर्षों पुरानी मांग थी !
अब तक हर साल मुस्लिम लड़कियों के दी गई राशी मे 700 करोड़ और जोड़ना अनिवार्य होगा !

हज सब्सिडी की हकीकत इसे जान लें
सब्सिडी हाजियों को या एयर इंडिया को ?
हज सब्सिडी के ज़रिये फ़िरक़ा परस्त कपटी लोग काफी वक़्त से मुसलमानो को शर्मशार करतें रहें हैं !
लेकिन क्या वाक़ई सब्सिडी हाजियों को दी जाती रही है ?
आइये नजरी हिसाब किताब निकालतें हैं !
🔻कैलकुलेशन ऑफ़ सब्सिडी🔻
फिलहाल मक्का शरीफ से इंडिया के लिये हाजियों का कोटा एक लाख छत्तीस हज़ार 1,36,000 का है ।
पिछले साल हमारी गवर्नमेंट ने सालाना बजट में 691 करोड़ हज सब्सिडी के तौर पर मंज़ूर किये थे !
691 करोड़ ÷ 1.36 lakh फ़ी हाजी = 50.8 हज़ार !
👉 राउंड फ़िगर में यानी एक हाजी के लिए 50,000/- रुपये !
अब ज़रा जुमला खर्च भी जोड़ लेते हैं
👉एक हाजी को हज के लिए गवर्नमेंट को एक लाख अस्सी हज़ार 1,80,000/- देनें पड़तें हैं ।
जिसमे चौतीस हज़ार 34,000/- लगभग 2100 रियाल मक्का पहुँचने के बाद हाजी को खर्च के लिए वापस मिलतें हैं !
1.8 लाख - 34000 = 1.46 लाख,
यानि हमें हमारी गवर्नमेंट को एक लाख छियालीस हज़ार [1,46,000/-] रुपये अदा करने पडतें हैं !
👉 मुम्बई से जद्दाह रिटर्न टिकट 2 महीने पहले बुक करतें हैं, तो कुछ फ्लाइट का किराया 25000/- रुपये से भी कम है ! फिर भी 25000/- रुपये ही मान लेतें हैं !
👉 खाना टैक्सी/बस का बंदोबस्त हाजियों को अलग से अपनी जेब से करना होता है !
👉 गवर्नमेंट को अदा किये एक लाख छियालीस हज़ार रुपये [1,46,000/-] में से होने वाला खर्च ___ विवरण :-
फ्लाइट = 25,000/-
मक्का में रहना(25दिन) = 50,000/-
मदीना में रहना(15दिन) = 20,000/-
अन्य खर्चे = 25,000/-
कुल खर्च हुआ =1,20,000/-√√√
😧 कन्फ्यूज़न 😧
👉 मतलब एक हाजी से लिये 1,46,000 रुपये और खर्च आया कुल 1,20,000 रुपये मतलब एक हाजी अपनी जेब से गवर्नमेंट को ही 26,000 देता है !
👉 अब असल मुद्दा ये है की जब हाजी सारा रुपया अपनी जेब से खर्च करता है, अलावा इसके 26,000 रुपये गवर्नमेंट के पास चले जातें है !
मतलब लगभग साफ़ है की सब्सिडी मिला कर गवर्नमेंट के पास 76,000 हज़ार हो जाता है तो ये पैसा जाता कहां है ?
26,000+50,000 × 1,36,000 = 10,33,60,00,000 [दस अरब तेतीस करोड़ साठ लाख रुपया],
👉 याद रहे की अनुमानतः एयर इंडिया कंपनी फिलहाल 2100 करोड़ के घाटे में चल है !
👉बिला शुबहा ये रुपया एयर इंडिया कंपनी और पॉलिटिशियन के जेब में जाता है !
और शर्मिंदा कुनीति-साज़िश के तहत मुसलमानों को किया जाता है !
ऐश करें पीएम, संसद, विधायक और ब्युरेक्रेट्स, इंडियन एयर लाईन का घटा भरपाई हो हाजियों से लेकिन बजट में इसे सरकार नें कभी आमदनी ही नहीं बताया ? नगाड़ा हज सब्सडीह का पीटते रहे और सरकार के पालित पोषित उपकृत लाल बत्ती में बैठ कर सरकारी सुविधा भोगी कौम के तनखईये ऐश करते रहे .. धन्यवाद पीएम मोदी व भारत सरकार !

तुमने बहाया होता

तुमने बहाया होता
देश की आज़ादी के लिए
खून अगर ,,
तुम्हारी नसों में अगर
बहता खून ईमानदारी का ,,,
सभी कुछ छोड़कर
बना देते तुम पहले लोकपाल ,,
लेकिन यही तो शायद
डी ऍन ऐ टेस्ट है तुम्हारा ,,अख्तर
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