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20 नवंबर 2017

क़ुरान का सन्देश

ग़रज़ उन्हें यक़ीनन एक सख़्त चिंघाड़ ने ले डाला तो हमने उन्हें कूडे़ करकट (का ढे़र) बना छोड़ा पस ज़ालिमों पर (ख़ुदा की) लानत है (41)
फिर हमने उनके बाद दूसरी क़ौमों को पैदा किया (42) कोई उम्मत अपने वक़्त मुर्क़रर से न आगे बढ़ सकती है न (उससे) पीछे हट सकती है (43)
फिर हमने लगातार बहुत से पैग़म्बर भेजे (मगर) जब जब किसी उम्मत का पैग़म्बर उन के पास आता तो ये लोग उसको झुठलाते थे तो हम भी (आगे पीछे) एक को दूसरे के बाद (हलाक) करते गए और हमने उन्हें (नेस्त व नाबूद करके) अफ़साना बना दिया तो इमान न लाने वालो पर ख़ुदा की लानत है (44)
फिर हमने मूसा और उनके भाई हारुन को अपनी निशानियों और वाज़ेए व रौशन दलील के साथ फ़िरऔन और उसके दरबार के उमराओं के पास रसूल बना कर भेजा (45)
तो उन लोगो ने शेख़ी की और वह थे ही बड़े सरकश लोग (46)
आपस मे कहने लगे क्या हम अपने ही ऐसे दो आदमियों पर इमान ले आएँ हालाँकि इन दोनों की (क़ौम की) क़ौम हमारी खि़दमत गारी करती है (47)
गरज़ उन लोगों ने इन दोनों को झुठलाया तो आखि़र ये सब के सब हलाक कर डाले गए (48)
और हमने मूसा को किताब (तौरैत) इसलिए अता की थी कि ये लोग हिदायत पाएँ (49)
और हमने मरियम के बेटे (ईसा) और उनकी माँ को (अपनी क़ुदरत की निशानी बनाया था) और उन दोनों को हमने एक ऊँची हमवार ठहरने के क़ाबिल चश्मे वाली ज़मीन पर (रहने की) जगह दी (50)

18 नवंबर 2017

क़ुरान का सन्देश

और उसमें भी शक नहीं कि तुम्हारे वास्ते चैपायों में भी इबरत की जगह है और (ख़ाक बला) जो कुछ उनके पेट में है उससे हम तुमको दूध पिलाते हैं और जानवरों में तो तुम्हारे और भी बहुत से फायदे हैं और उन्हीं में से बाज़ तुम खाते हो (21) और उन्हें जानवरों और कश्तियों पर चढे़ चढ़े फिरते भी हो (22)
और हमने नूह को उनकी क़ौम के पास पैग़म्बर बनाकर भेजा तो नूह ने (उनसे) कहा ऐ मेरी क़ौम खु़दा ही की इबादत करो उसके सिवा कोई तुम्हारा माबूद नहीं तो क्या तुम (उससे) डरते नहीं हो (23)
तो उनकी क़ौम के सरदारों ने जो काफ़िर थे कहा कि ये भी तो बस (आखि़र) तुम्हारे ही सा आदमी है (मगर) इसकी तमन्ना ये है कि तुम पर बुज़ुर्गी हासिल करे और अगर खु़दा (पैग़म्बर ही न भेजना) चाहता तो फरिश्तों को नाजि़ल करता हम ने तो (भाई) ऐसी बात अपने अगले बाप दादाओं में (भी होती) नहीं सुनी (24)
हो न हों बस ये एक आदमी है जिसे जुनून हो गया है ग़रज़ तुम लोग एक (ख़ास) वक़्त तक (इसके अन्जाम का) इन्तेज़ार देखो (25)
नूह ने (ये बातें सुनकर) दुआ की ऐ मेरे पलने वाले मेरी मदद कर (26)
इस वजह से कि उन लोगों ने मुझे झुठला दिया तो हमने नूह के पास ‘वही’ भेजी कि तुम हमारे सामने हमारे हुक्म के मुताबिक़ कश्ती बनाना शुरु करो फिर जब कल हमारा अज़ाब आ जाए और तनूर (से पानी) उबलने लगे तो तुम उसमें हर किस्म (के जानवरों में) से (नर व मादा) दो दो का जोड़ा और अपने लड़के बालों को बिठा लो मगर उन में से जिसकी निस्बत (ग़रक़ होने का) पहले से हमारा हुक्म हो चुका है (उन्हें छोड़ दो) और जिन लोगों ने (हमारे हुकम से) सरकशी की है उनके बारे में मुझसे कुछ कहना (सुनना) नहीं क्योंकि ये लोग यक़ीनन डूबने वाले है (27)
ग़रज़ जब तुम अपने हमराहियों के साथ कश्ती पर दुरुस्त बैठो तो कहो तमाम हम्द व सना का सज़ावार खुदा ही है जिसने हमको ज़ालिम लोगों से नजात दी (28)
और दुआ करो कि ऐ मेरे पालने वाले तू मुझको (दरख़्त के पानी की) बा बरकत जगह में उतारना और तू तो सब उतारने वालो से बेहतर है (29)
इसमें शक नहीं कि उसमे (हमारी क़ुदरत की) बहुत सी निशानियाँ हैं और हमको तो बस उनका इम्तिहान लेना मंज़ूर था (30)

क़ुरआन का संदेशः

जो बेहिश्त बरीं का हिस्सा लेगें (और) यही लोग इसमें हमेशा(जिन्दा) रहेंगे (11)  
और हमने आदमी को गीली मिट्टी के जौहर से पैदा किया (12)
फिर हमने उसको एक महफूज़ जगह (औरत के रहम में) नुत्फ़ा बना कर रखा (13)
फिर हम ही ने नुतफ़े को जमा हुआ ख़ून बनाया फिर हम ही ने मुनजमिद खू़न को गोश्त का लोथड़ा बनाया हम ही ने लोथडे़ की हड्डियाँ बनायीं फिर हम ही ने हड्डियों पर गोश्त चढ़ाया फिर हम ही ने उसको (रुह डालकर) एक दूसरी सूरत में पैदा किया तो (सुबहान अल्लाह) ख़ुदा बा बरकत है जो सब बनाने वालो से बेहतर है (14)
फिर इसके बाद यक़ीनन तुम सब लोगों को (एक न एक दिन) मरना है (15)
इसके बाद क़यामत के दिन तुम सब के सब कब्रों से उठाए जाओगे (16)
और हम ही ने तुम्हारे ऊपर तह ब तह आसमान बनाए और हम मख़लूक़ात से बेख़बर नही है (17)
और हमने आसमान से एक अन्दाजे़ के साथ पानी बरसाया फिर उसको ज़मीन में (हसब मसलहत) ठहराए रखा और हम तो यक़ीनन उसके ग़ाएब कर देने पर भी क़ाबू रखते है (18)
फिर हमने उस पानी से तुम्हारे वास्ते खजूरों और अँगूरों के बाग़ात बनाए कि उनमें तुम्हारे वास्ते (तरह तरह के) बहुतेरे मेवे (पैदा होते) हैं उनमें से बाज़ को तुम खाते हो (19)
और (हम ही ने ज़ैतून का) दरख़्त (पैदा किया) जो तूरे सीना (पहाड़) में (कसरत से) पैदा होता है जिससे तेल भी निकलता है और खाने वालों के लिए सालन भी है (20)

16 नवंबर 2017

क़ुरान का सन्देश

अलबत्ता वह इमान लाने वाले रस्तगार हुए (1) जो अपनी नमाज़ों में (खुदा के सामने) गिड़गिड़ाते हैं (2)
और जो बेहूदा बातों से मुँह फेरे रहते हैं (3)
और जो ज़कात (अदा) किया करते हैं (4)
और जो (अपनी) शर्मगाहों को (हराम से) बचाते हैं (5)
मगर अपनी बीबियों से या अपनी ज़र ख़रीद लौनडियों से कि उन पर हरगिज़ इल्ज़ाम नहीं हो सकता (6)
पस जो शख़्स उसके सिवा किसी और तरीके़ से शहवत परस्ती की तमन्ना करे तो ऐसे ही लोग हद से बढ़ जाने वाले हैं (7)
और जो अपनी अमानतों और अपने एहद का लिहाज़ रखते हैं (8)
और जो अपनी नमाज़ों की पाबन्दी करते हैं (9)
(आदमी की औलाद में) यही लोग सच्चे वारिस है (10)

15 नवंबर 2017

एक छोटे से मोहल्ले में बुलंद इरादों के साथ जन्मे भाई अब्दुल हनीफ ज़ैदी

एक छोटे से परिवार में ,,एक छोटे से मोहल्ले में बुलंद इरादों के साथ जन्मे भाई अब्दुल हनीफ ज़ैदी किसी परिचय के मोहताज नहीं है ,,भाई ज़ैदी प्रारम्भिक शिक्षा के बाद कोटा राजकीय महाविद्यालय में ही कर्मकार बने ,,उन्होंने अपने जीवन में कई पीड़ित छात्र छात्राओं का मार्गदर्शन किया ,,अनेक समाज सेवा कार्यो से जुड़े भाई अब्दुल हनीफ ज़ैदी ,,अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पित रहे ,,लेकिन थ्री इडियट फिल्म की तरह इनके फोटोग्राफी के शोक ने ,,ज़ैदी को विश्व विख्यात फोटोग्राफर बना दिया ,,,दुर्लभ फोटो कलाकृतियां ,,दुर्लभ फोटोग्राफी के लिए प्रसिद्ध हुए ज़ैदी एक ऐसे फोटोग्राफर कहे जाने लगे ,,जिनकी तस्वीर बोल उठने को तैयार रहती थी ,,ब्लेक ऐंड व्हाइट ,,छोटे छोटे देसी केमरो की शुरुआत से ,,इनकी फोटोग्राफी जीवंत थे ,,उनमे ब्रश से रंग भर उन्हें और खूबसूरत बनाने की इनकी कला ने इन्हे मक़बूल कर दिया ,,अब्दुल हनीफ ज़ैदी अब ऐ एच ज़ैदी हो गए ,,,कोटा के अभ्यारण्य क्षेत्र ,,वन क्षेत्र ,चंबल की कराइयों से लेकर ,,यहां की वन सम्पदा ,, पुरातत्व महत्व की ऐतिहासिक मंज़र कशी ,,,वन्य जीव ,,पक्षी ,वनस्पति की फोटोग्राफी हाड़ोती की धरती पर पारंगत तरीके से अगर किसी ,ने की तो वोह गुदड़ी के इस लाल भाई ऐ एच ज़ैदी ने की ,,हमेशा मुस्कुराते रहना ,कैमरा गले में टांक कर ,,किसी भी अचम्भित कर देने वाले फोटो की तलाश में घात लगाकर घूमना इनकी आदत रही है ,,कई फोटोग्राफर आज भी इन्हे उस्ताद मानकर इनकी पूजा करते है ,,कोटा ही नहीं ,,,,देश विदेश के प्रसिद्ध लेखकों की महत्वपूर्ण पुस्तकों ,,स्मारिकाओं ,,एलबमों में भाई ऐ एच ज़ैदी के फोटो ज़रूर शामिल रहते है ,,लेखक तो सिर्फ अलफ़ाज़ लिखते है ,,लेकिन उनके अल्फ़ाज़ों को ज़िंदगी ,,अल्फ़ाज़ों को पहचान भाई ज़ैदी की फोटोग्राफी आर्ट से बनाई गयी तस्वीरों ने दी है ,,,जूलॉजी यानी जीव विज्ञानं विभाग में महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त होने के कारण ,,इन्होने वन्य जीव से लेकर पशु पक्षी ,,सहित पक्षियों के बसेरे घोसले ,,वन्य जीव के गुफाओं से लेकर ,,चंबल के कटाव ,,हरियाली ,,खुशहाली ,,फूल ,,पत्तियों ,,उन पर बसेरा करने वाले कीटों ,,कीड़े मकोड़ो तक की फोटोग्राफी की है ,,उनकी यह तस्वीरें आज भी विश्वप्रसिद्ध ज्ञानवर्धक पुस्तकों में इनके नाम से प्रकाशित है ,,,एक छोटे से ब्लेक ऐंड व्हाइट कैमरे से शुरआत कर ,,आज ज़ूम ,,फिर ,,शूटिंग ,,फिर आधुनिक कैमरे की इस फोटोग्राफ़ी युग में भी भाई ज़ैदी उस्तादों के उस्ताद है ,,उस्तादी के बाद भी सादगी की मुस्कुराहट ,,मददगारी का जज़्बा ,,छोटो को सिखाने के जूनून ने ज़ैदी को दुसरो से अलग ,,ख़ास बना दिया है ,,,मोहब्बत ,,क़ौमी एकता का पैगाम देकर कई बार इन्होने अपने दोस्तों दूसरे समाजो को चौंका दिया है ,,उम्र पर तो इन्होने जैसे माशाअललाह किसी अदालत से स्थगन ले लिया है ,इसीलिए इनकी उम्र बढ़ने का नाम ही नहीं लेती है ,,बच्चो में बच्चे ,,जवानो में जवान ,,,यारों में यार ,,भाई ज़ैदी की कई खूबियां है जो चंद अल्फ़ाज़ों में बयान करना मुश्किल ही नहीं ना मुमकिन ,है ,,,लेकिन एक कमज़ोरी जो सभी की होती है ,भाभी के हुकम पर चलने की वोह तो है ही ना ,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
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